हिम तनया प्रस्तर अंतस से निकली गंगा गीता हूँ
प्रेम पगी मैं सरल सहज भारत की पावन सीता हूँ
मौन निमंत्रण चैतन्य मिलन भवसागर से तरना है
परम इबादत करने सागर घुलने चली पुनीता हूँ
-- ज्योत्सना सक्सेना
प्रेम पगी मैं सरल सहज भारत की पावन सीता हूँ
मौन निमंत्रण चैतन्य मिलन भवसागर से तरना है
परम इबादत करने सागर घुलने चली पुनीता हूँ
-- ज्योत्सना सक्सेना
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें