जल जाते हैं पाँव ..
मेरे एहसासों की बर्फ से
सिक जाते है ज़ख्म मेरे..
अरमानो की मोम से...
छिड़क देते हैं...
.खुशबु ए तराने...वादियों में..
महक उठती हैं अमराइयाँ..
कुहक उठती है कोयलिया..
पिघलने लगते हैं..
.ज़ज्बातों के फूल...
झरते झरते गुलमोहर औ अमलताश...
कोमल पत्ते...गुनगुनाती पवन...
ओस का पत्तों पर नटराज सा नर्तन...
झूम झूम के गा रही....
केसरिया चुनरी ओढ़े ...
सांझ की सी दुल्हन..
- ज्योत्सना सक्सेना
मेरे एहसासों की बर्फ से
सिक जाते है ज़ख्म मेरे..
अरमानो की मोम से...
छिड़क देते हैं...
.खुशबु ए तराने...वादियों में..
महक उठती हैं अमराइयाँ..
कुहक उठती है कोयलिया..
पिघलने लगते हैं..
.ज़ज्बातों के फूल...
झरते झरते गुलमोहर औ अमलताश...
कोमल पत्ते...गुनगुनाती पवन...
ओस का पत्तों पर नटराज सा नर्तन...
झूम झूम के गा रही....
केसरिया चुनरी ओढ़े ...
सांझ की सी दुल्हन..
- ज्योत्सना सक्सेना
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