धरती के हाथों में फूलों की है माला
मदहोशी में रत्नाकर भरता है प्याला
तारे करते चम चम मोती मीनाकारी
उल्लासित नभ रचता नूतन इक मधुशाला
-- ज्योत्सना सक्सेना
मदहोशी में रत्नाकर भरता है प्याला
तारे करते चम चम मोती मीनाकारी
उल्लासित नभ रचता नूतन इक मधुशाला
-- ज्योत्सना सक्सेना
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