शुक्रवार, जून 10, 2016

युवराज सलोना

नदिया देखी परबत देखे बांचा खेत नगर का कोना 
नीले निभृत नभ आव्हान मुझे साहस सपने है बोना 
ले आयु पंख उन्मुक्त चला मैं नभ लिपियों को पढने 
बादल फाहे भर मुट्टी गीत गुनूँ मैं युवराज सलोना 
-- ज्योत्सना सक्सेना .

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