समर्पित भाव
ईश्वर की दृष्टि में भक्त द्वारा भेट की गई वस्तु का मूल्य नही होता...वह तो लोभी है...भाव का..इसलिए भेंट देते समय समर्पित भाव से प्रकृति से प्राप्त वस्तुएं प्रिय हैं प्रभु को...और शबरी सा प्रेमयुक्त भाव...और भेंट के बदले कोई मांग न रखो...वो तो बिन मांगे ही मोती देता है
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