सोमवार, जून 06, 2016

नवयुग पुकारता


नीला घूंघट नीलाभ उठा दें ---- मौक़ा तो दो
श्लथ बाहों में पुरुषार्थ जगा दें --- मौका तो दो
लहर लहर कर्म दीप जलाकर प्रतीक्षारत नवयुग 
सूरज को बहता निर्झर बना दें --- मौका तो दो
--- ज्योत्सना सक्सेना

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें