शुक्रवार, जून 10, 2016

होली की रचना

रंगरंगीली होरी आई 
रसरसीली छो ,,,, री 
अलगोजा और चंग बजे रे 
सजणा नीयत डोली ,,,,
दादुर मोर पपीहा चहके 
फुदके आँगन गौरैया
कामदेव रति रिझावें
मन फूटें फुलझड़ियाँ
रंगरंगीली होरी आई
रसरसीली छो ,,,, री
अवध में बन रही
कनक की गुझियाँ
जैपर घेवर साजे
मस्तानो की टोली
खुलके रंगभंग की छाने
रंगरंगीली होरी आई
रसरसीली छो ,,,, री
बिजुरी चमके जियरा हरसे
चंचल अल्हड़ टोली
नैन मटक्का कर ले गोरी
झूला इमली डारी
रंगरंगीली होरी आई
रसरसीली छो ,,,, री
शिव डमरू सा मन डोले है
थिरके पग ता ता थै,,, या
कान्हा नैनन की पिचकारी
दिल बाजे शहनई,,, याँ
रंगरंगीली होरी आई
रसरसीली छो ,,,, री
-- ज्योत्सना सक्सेना

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