फलक के चौबारे में ..
मोतियों से बिखरे दाने..
चमकीले नगीने से उभरे सितारे..
किसी की दुआओं को पूरा करते सितारे..
खुद टूट जाते...जोड़ते दो दिलो को...
बिखेरकर अपने अरमान...
समेटते हसरतों को..
बांधते नेह्बंधनों को..
सितारा टूटा..हर्षा गया ..
महका गया...कबूल हुई दुआ..
भीगी आँखे..स्नेहिल फुहार में..
अलौकिक आनंद ..अनोखी कान्ति दे गया..
एक तेजोमयी उम्मीद दे गया...वो टूटता सितारा ..
- ज्योत्सना सक्सेना
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