भावों का भूखा है साईं
मंदिर का नही मोहताज
है भक्तों का दास वो साईं
श्रद्धा सबूरी जिसका विश्वास
साईं इन्हें कुछ बुद्धि दे दो
कर ले बातें आचार व्यवहार की
कुछ सुविचार और संस्कार की
अर्थ का हो कभी ना अनर्थ
करें बात प्रीत और परमार्थ की
करुणा दया बसे मन में
कडवी बाते क्यूँ स्वार्थ की
धर्म का मूल नही है दंभ
राह छोडो टकराव की
माला फेरना पराया अपना
भूलो थोथी शान
-- ज्योत्सना सक्सेना
मंदिर का नही मोहताज
है भक्तों का दास वो साईं
श्रद्धा सबूरी जिसका विश्वास
साईं इन्हें कुछ बुद्धि दे दो
कर ले बातें आचार व्यवहार की
कुछ सुविचार और संस्कार की
अर्थ का हो कभी ना अनर्थ
करें बात प्रीत और परमार्थ की
करुणा दया बसे मन में
कडवी बाते क्यूँ स्वार्थ की
धर्म का मूल नही है दंभ
राह छोडो टकराव की
माला फेरना पराया अपना
भूलो थोथी शान
-- ज्योत्सना सक्सेना