मंगलवार, मई 01, 2012

सांझ आई

नित्य की भांति आज भी साँझ आई
नववधू सा श्रंगार कर भी एक उदासी सी लाई
पश्चिमी क्षितिज के लाल रंग में
दिखी वियोग की परछाईं
वियोग की वे रश्मियाँ वेदना का सुप्त सौंदर्य लाई
वही सुहागन सा सिन्दूरी रंग
महकती थी तरुणाई
लगता था किसी ने नववधू के अरमानो की रक्तिम चिता जलाई |

-- ज्योत्स्ना सक्सेना       

रविवार, अप्रैल 29, 2012

मन की बात

पल भर में ही तो
क्या से क्या हो जाता है
हँसते हँसते कुछ मिनटों में
मन विचलित सा हो जाता है
झटके में ही तो
अतीत अंधकार में सो जाता है
वर्तमान का स्वर्णिम सपना
मधुरिम अतीत में खो जाता है
बेरहम रिश्तों की यादों से
ये मन क्यूँ भर भर आता है
मिलन घडी भर के उन्माद में
मन हर्षित सा हो जाता है
           
     -ज्योत्स्ना सक्सेना

विज्ञापन

लगता है जयपुर वासी कभी नहीं नहाते हैं

तभी तो आकाशवाणी जयपुर  रोज रोज साबुनों के विज्ञापन सुनवाते हैं |


-ज्योत्स्ना सक्सेना 

विनम्र नमन


नमन महान व्यक्तित्व को ,नमन बच्चो के प्यारे कलाम को
विनम्र नमन फौलाद से लौह पुरुष को
नमन मिसाइल  मैन को
वैज्ञानिक विकास के पथप्रदर्शक को 
 प्रणाम निर्विवाद व्यक्तित्व को
दिव्यभास्कर सा आकर्षण तुम्हारा
सर्वोच्च नागरिक रहकर भी सरल ह्रदय तुम्हारा
नमन तुम्हे, नमन तुम्हे....
निर्मल ताड़ के कमलपुष्प हो
प्रतीक हो तुम शांति के,शक्ति के
नमन आपकी परिकल्पनाओं को
जहाँ एक ओर त्रिशूल, नाग, पृथ्वी ,आकाश और अग्नि मिसाइल दी
वहीं दूजी ओर निश्छल बालमन ,मोम सा दिल
नमन आपको जो आपने हमें परमाणु शक्ति वाला राष्ट्र दिया
हमारे दुश्मनों के हौसलों को पस्त किया
आतंकी देश थर्राते हैं ...
नमन आपकी आस्था को
जो राम रहीम एक मानते हैं
गीता,कुरान ,बाइबिल को एक स्थान देते हैं
नमन आपको जो बच्चों के साथ बच्चे बने रहते हैं
नमन आपकी बाल सुलभ मुस्कान को 
दमको चमको फिर से रह दिखाओ
भारत को भ्रष्टाचार से मुक्त कराओ ......                                                        
                                                       --  ज्योत्स्ना सक्सेना