रविवार, अप्रैल 29, 2012

मन की बात

पल भर में ही तो
क्या से क्या हो जाता है
हँसते हँसते कुछ मिनटों में
मन विचलित सा हो जाता है
झटके में ही तो
अतीत अंधकार में सो जाता है
वर्तमान का स्वर्णिम सपना
मधुरिम अतीत में खो जाता है
बेरहम रिश्तों की यादों से
ये मन क्यूँ भर भर आता है
मिलन घडी भर के उन्माद में
मन हर्षित सा हो जाता है
           
     -ज्योत्स्ना सक्सेना

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