प्रतिकूलता में अनुकूलता
सरिता की विशेषता
जोड़ना ही जोड़ना
ना तोडना ना छोड़ना
प्यार के संगीत से
लहरों को है बांधना
सज संवर मचल उठी
वन्दित पुष्प संचेतना
नेह के अभिसार से
मुखरित हुई संवेदना
समर्पणी भाव में
गा उठी अभिव्यंजना
खामोश सा समंदर
मिठास पीता रहेगा और
साधिका को देता रहेगा यंत्रणा ?
-- ज्योत्सना सक्सेना
सरिता की विशेषता
जोड़ना ही जोड़ना
ना तोडना ना छोड़ना
प्यार के संगीत से
लहरों को है बांधना
सज संवर मचल उठी
वन्दित पुष्प संचेतना
नेह के अभिसार से
मुखरित हुई संवेदना
समर्पणी भाव में
गा उठी अभिव्यंजना
खामोश सा समंदर
मिठास पीता रहेगा और
साधिका को देता रहेगा यंत्रणा ?
-- ज्योत्सना सक्सेना
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें