मंगलवार, अगस्त 05, 2014

फ़रिश्ता

खामोश साँझों को चहकाने आ जाता है रोज़ एक फ़रिश्ता 
ख़्वाबों में मिठास भर जाता है हर रोज़ एक फ़रिश्ता 
सितारों के मन आँगन में आशाओं के सपने बोकर 
उदासियों के बादल समेट ले जाता है रोज एक फ़रिश्ता

-- ज्योत्सना सक्सेना

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