कालू का सपना ----****************
कम उम्र, भारी थैलाकिस्मत ने दिया
कालू को
कबाड़ चुनने का ठेका
कचरे में मिलते हैं
स्वप्न रंगीले
आज मिला है उसको
ड्राइंग बॉक्स का खोखा
ढूंढ रहा है इसके भीतर
अम्मा की रंगीन चूड़ियाँ
मोर के सुंदर पंख
शंख और सीपियाँ
सजीले सपनों में
देख रहा है , कंधे पर
किताबों से भरा बस्ता ----
लगाकर टाई
लटकाकर
पानी की बोतल
राजा बाबू बनकर
पढ़ने जाऊंगा ---
छन छनाक
सपना टूटा
किरचें चुभने लगी
पंख सा हल्का बैग
हकीकत में भारी हो गया
फिर कबाड़ पर कचरे जैसा
अपने को पाया-------
चला था
पाषाणों पर निशां बनाने
खुशहाली के चित्र सजाने को
अरमानों को पंख कहाँ मिलते हैं
चिथड़े कपड़ों को सिलने
कौन कहाँ कब मिलते हैं----
लौट आया कालू अपनी जमीन पर
चूमकर अपने साथी कुत्तों को
निकल पड़ा
सपनों का थैला टांगकर
अगले कचरे के ढ़ेर पर
फिर एक नए मुकाम पर -----
--- ज्योत्सना सक्सेना
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