रिश्तों की भरी जेठ दुपहरी , छंदित मधुमयी हुई पुरवाई
सावन की बदली चटकी थी , छू ली किसने मन अमराई
तन्हा-सांझो की पीर भूल, बांटे गीत कोयल मतवाली
मुरझाया मन हुआ गुलमोहर सुप्त भावों ने ली अंगडाई
--- ©ज्योत्सना सक्सेना
सावन की बदली चटकी थी , छू ली किसने मन अमराई
तन्हा-सांझो की पीर भूल, बांटे गीत कोयल मतवाली
मुरझाया मन हुआ गुलमोहर सुप्त भावों ने ली अंगडाई
--- ©ज्योत्सना सक्सेना
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