शुक्रवार, जून 10, 2016

बेटी

रंगोली बनाती धरा जो सजाये 
बहारें खिलाती सखी बन वो आये 
ख़ुशी में बदल दे ग़मों की बदलियाँ 
रसीली छबीली कली मुस्कुराये
उजाला खिला दे अँधेरा मिटाकर 
जले दीप हर घर दिवाली मनाये
मुखौटे लगाए दिखे थे बहुत से
उदासी हटाये परी सी हँसाए
ठुमकती चले वो छमाछम छमाछम
चढ़ी गोद सबके दुआएं मुस्काएं
मुसाफिर सभी हैं सफर है कठिन सा
कदम कुछ मुहब्बत के हम मिल बढ़ाये
सुहाना हो मौसम नए गीत रच दे
पपीहा दिवाना सा मल्हार गाये
ख़ुशी ज्योति झूले झुलाती है हर पल
दुखों को हमेशा भुलाते जो आये
-- ©ज्योत्सना सक्सेना

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