चाहतें धड़कन बनी थी गुनगुनाती सी लगी
तीरगी में बन सितारा जगमगाती सी लगी
आजमा के देख ले फिर इश्क़ करता मुझसे ही
लाख तू नज़रें छिपाए मुस्कुराती सी लगी
बेख़ुदी है इश्क़ की जो होश में हैं हम नही
आग लगने पर फसल दिल लहलहाती सी लगी
गज़ल की देखो शरारत शे'र लब पे लिख दिए
शोख आँखों शायरी खुद खिलखिलाती सी लगी
बेख़बर नादान सा था तोड़ता था दिल मिरा
भूल उनकी ज्योति तुझको फिर सताती सी लगी
-- ज्योत्सना सक्सेना
तीरगी में बन सितारा जगमगाती सी लगी
आजमा के देख ले फिर इश्क़ करता मुझसे ही
लाख तू नज़रें छिपाए मुस्कुराती सी लगी
बेख़ुदी है इश्क़ की जो होश में हैं हम नही
आग लगने पर फसल दिल लहलहाती सी लगी
गज़ल की देखो शरारत शे'र लब पे लिख दिए
शोख आँखों शायरी खुद खिलखिलाती सी लगी
बेख़बर नादान सा था तोड़ता था दिल मिरा
भूल उनकी ज्योति तुझको फिर सताती सी लगी
-- ज्योत्सना सक्सेना
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें