इंद्रधनुष के भाव छोर पर मदिरा के वो जाम
यादों के सुधि सावन से छलके उनके पैगाम
क्षितिज फैली कामना तोड़ो माया भ्रम के जाल
उदारमना बन पूर्ण करों प्रभु के दिए सब काम
--- --- -- ज्योत्सना सक्सेना.
यादों के सुधि सावन से छलके उनके पैगाम
क्षितिज फैली कामना तोड़ो माया भ्रम के जाल
उदारमना बन पूर्ण करों प्रभु के दिए सब काम
--- --- -- ज्योत्सना सक्सेना.
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