शुक्रवार, जून 05, 2015

चाह ना और सजना

कुछ देर ठहर जाओ , चाह ना और सजना 
नयनन में बस जाओ , अमृत मांगूं सजना
तनहा न रहूँ इक पल , कुछ स्वप्न सजा जाओ 
ढल जाये ग़ज़लों में , इक साज़ बजा जाओ 
नयनन में बस जाओ , अमृत मांगूं सजना
सितारों की नगरी में , तनहा ना रह जाऊं
ख्वाबों के बादल में , इक चाँद उगा जाओ
नयनन में बस जाओ , अमृत मांगूं सजना
सूने होते उपवन में , सुगंध बहा जाओ
जर्द हुए नशेमन को , प्रेमसुधा पिला जाओ
कुछ देर ठहर जाओ , चाह ना और सजना
नयनन में बस जाओ , अमृत मांगूं सजना
-- ज्योत्सना सक्सेना

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