कैसा निकला ये बरस , बोलूं क्या श्रीमान
धरती की चीखें सुनी , देखा लहूलुहान
धरती की चीखें सुनी , देखा लहूलुहान
एक ओर तो दुःख बड़ा , पीड़ा है घनघोर
घायल है इंसानियत , बच्चों का हैं शोर
घायल है इंसानियत , बच्चों का हैं शोर
देश हमारे रह रहा , मिलजुलकर इंसान
कर्मठता को कर नमन , उड़ाए मंगलयान
कर्मठता को कर नमन , उड़ाए मंगलयान
इतनी बिनती ज्योति की , सुन लो हे जगदीश
विनीत भाव मांग रही , खड़ी झुकाये शीश
विनीत भाव मांग रही , खड़ी झुकाये शीश
पग धरती छूते रहें , मन गगन का छोर
साहस भरे उठें कदम , नई भोर की ओर
साहस भरे उठें कदम , नई भोर की ओर
ममता करुणा मन बहे , ऐसा दो वरदान
फूटें रश्मि की किरणें, मिटे तमस की खान
फूटें रश्मि की किरणें, मिटे तमस की खान
भाईचारा बढ़ सके ,सबको दो सद्ज्ञान
विश्वगुरु बने हमारा , भारत देश महान
-- ज्योत्सना सक्सेना
विश्वगुरु बने हमारा , भारत देश महान
-- ज्योत्सना सक्सेना
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