शुक्रवार, जून 05, 2015

चंदा रे चंदा

बहुत दूर फलक पे है , अपनापन समाया है
चंदा तू कुछ भी नही , पर दिल में समाया है
अकेला ये जीवन है , नयनो भरा सावन है
दूर तेरे मुखड़े में , बिम्ब उनका समाया है 
चंदा तू कुछ भी नही , पर दिल में समाया है
चाहत के सितारे हैं , विरह भरे तराने हैं
मन आँगन उतर आओ , भीगा शामियाना हैं
चंदा तू कुछ भी नही , पर दिल में समाया है
गम के घने बादल हैं , आशा भरी बिजली है
अँधेरे में जीने की ,कला को चमकाया है
चंदा तू कुछ भी नही , पर दिल में समाया है
शाम नखराली है रे , दीदारे दिल प्यासा है
बेनूर होकर भी तू , सात रंग से नहाया है
चंदा तू कुछ भी नही , पर दिल में समाया है
बहुत दूर फलक पे है , अपनापन समाया है
चंदा तू कुछ भी नही , पर दिल में समाया है
-- ज्योत्सना सक्सेना

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