साजन ख्वाबों में आ जाते
मिलकर सृजन बेल लगाते
आशा का हम दिया जलाकर
स्मृति पुल का फेरा कर आते
कच्ची पक्की मुंडेरों पर
प्रेम लता परवान चढ़ाते
घूंघट में आँखों की मदिरा
पांव में घुँघरू छनकाते
मधुमय डगर पनघट में हम
घटघट फिर खुशियां छलकाते
-- ज्योत्सना सक्सेना
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