शुक्रवार, जून 05, 2015

माया है ये जगत

बावरा है ये मन 
चल पड़ा है किधर 
रोक ले ,,,, रोक ले ,,,,, रोक ले
बिखरा जादू इधर 
माया है ये जगत 
फिसलन हर डगर
मत बढ़ा तू कदम
रोक ले ,,, रोक ले ,,,, रोक ले
बन परम का फ़कीर
छोड़ अर्थ की लड़ाई
मेट धर्म की लकीर
मत बढ़ा तू कदम
रोक ले ,,, रोक ले ,,,, रोक ले
सुबह के रंगों में ढल
शाम को तारों की सुन
आज़ाद हो बंद कक्षों से तुम
मत बढ़ा तू कदम
रोक ले ,,, रोक ले ,,,, रोक ले
नदिया की कलकल तू सुन
ओस में नंगे पाँव फिर चल
मुरली वाले पे अपनी फ़िकर छोड़ दे
मत बढ़ा तू कदम
रोक ले ,,,, रोक ले ,,,, रोक ले
बिखरा जादू इधर
माया है ये जगत
मत बढ़ा तू कदम
रोक ले ,,, रोक ले ,,,, रोक ले
-- ज्योत्सना सक्सेना

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