तन्हा वीरान उदास रेतीली डगर
क्या कहे जीवन चक्र पतझरी ये सफर
हो अँधेरा गहन फूटे तभी रविकिरण
रचो कुछ गीत जागेंगे जो हर प्रहर
कन्धों पर अहम बोझा है भारी बहुत
छोड़ लोभ गठरी यहीं कुछ पल तू ठहर
चलाचल चलाचल करें नवसृष्टि सृजन
गायें ख़ुशी भरे मल्हार अब हम नगर
उस परम तत्व दृढ द्वार में ही छिपे
ढूंढ ले तू शतदल हो ना जाये कहर
-- ज्योत्सना सक्सेना
क्या कहे जीवन चक्र पतझरी ये सफर
हो अँधेरा गहन फूटे तभी रविकिरण
रचो कुछ गीत जागेंगे जो हर प्रहर
कन्धों पर अहम बोझा है भारी बहुत
छोड़ लोभ गठरी यहीं कुछ पल तू ठहर
चलाचल चलाचल करें नवसृष्टि सृजन
गायें ख़ुशी भरे मल्हार अब हम नगर
उस परम तत्व दृढ द्वार में ही छिपे
ढूंढ ले तू शतदल हो ना जाये कहर
-- ज्योत्सना सक्सेना
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