शनिवार, सितंबर 20, 2014

ओ !!! मीत

अश्क़ टपाटप गिर रहे , करवट सोई प्रीत। 
रिश्ते पल में रूठ गये ,कैसी जग की रीत।।
दीप प्रेम का जला के ,करो रात को प्रात। 
साँसे पल को थाम के , पूर्ण करो जज्बात।।
मान मनौव्वल हो रहा , भौंरों सा संगीत। 
मधुर मदिर मधुयामिनी ,फूलों जैसी प्रीत।।
दुनियादारी भूल गए , मनमोहन ओ मीत।
लाज हया को भूल के , गाती तेरे गीत।।
-- ज्योत्सना सक्सेना

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