अश्क़ टपाटप गिर रहे , करवट सोई प्रीत।
रिश्ते पल में रूठ गये ,कैसी जग की रीत।।
दीप प्रेम का जला के ,करो रात को प्रात।
साँसे पल को थाम के , पूर्ण करो जज्बात।।
मान मनौव्वल हो रहा , भौंरों सा संगीत।
मधुर मदिर मधुयामिनी ,फूलों जैसी प्रीत।।
दुनियादारी भूल गए , मनमोहन ओ मीत।
लाज हया को भूल के , गाती तेरे गीत।।
-- ज्योत्सना सक्सेना
रिश्ते पल में रूठ गये ,कैसी जग की रीत।।
दीप प्रेम का जला के ,करो रात को प्रात।
साँसे पल को थाम के , पूर्ण करो जज्बात।।
मान मनौव्वल हो रहा , भौंरों सा संगीत।
मधुर मदिर मधुयामिनी ,फूलों जैसी प्रीत।।
दुनियादारी भूल गए , मनमोहन ओ मीत।
लाज हया को भूल के , गाती तेरे गीत।।
-- ज्योत्सना सक्सेना
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