खामोश निशा में चमकीले पुंजों से पुकारते हैं तुम्हारे गीत
संवेदनाओं की बर्फ में गुनगुनाते हैं आज भी तुम्हारे गीत
शाम की तन्हाइयों में कृष्ण की बांसुरी से पुकारते हो क्यों
एहसासों के चन्दन वन में राधा सी गाती हूँ तुम्हारे गीत
-- ज्योत्सना सक्सेना
संवेदनाओं की बर्फ में गुनगुनाते हैं आज भी तुम्हारे गीत
शाम की तन्हाइयों में कृष्ण की बांसुरी से पुकारते हो क्यों
एहसासों के चन्दन वन में राधा सी गाती हूँ तुम्हारे गीत
-- ज्योत्सना सक्सेना
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