मंगलवार, सितंबर 23, 2014

फिर याद आ गए तुम *********************

फिर याद आ गए तुम 
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तारों के झिलमिलाते आँगन में 
अम्बर के अंतहीन ह्रदय में अंकित 
पूर्णिमा का चाँद देखते ही
एक बार फिर
याद आ गए तुम ----
युगल पंछियों का
नीड़ की ओर बढ़ना
देख धरा की प्यास
श्यामल पावसों का उमड़ना
मुखरित हुआ अनूठा एहसास
प्रतीक्षारत साँझ में
एक बार फिर
याद आ गए तुम ----
चाँद की लरजती खूबसूरती में
मुग्ध तारों का मौन हो जाना
आकाश की स्तब्ध नीरवता में
एक बार फिर
याद आ गए तुम ----
---- ज्योत्सना सक्सेना

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