सोमवार, मार्च 02, 2015

कुछ दोहे ''फाग ''पर ,,, सुझाव आमंत्रित
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गालों में टेसू खिले , हृदय बज रहे साज
चूनर सीली हो गई , बेसुध नाचूं आज
आलिंगन करती लगे , ये फागुनी बयार
गुनगुन करता अलि करे, छेड़छाड़ सिंगार
भंग चढ़े बिन ही पिए , ऐसा पी का संग
अंग-अंग सावन करे , लगा-लगाकर रंग
पवन हुई मदहोश सी , मँजरी गावे गीत
नीम आम बौराय से , खिली हुई थी प्रीत
छलक छलक मदिरा गिरे , नैनों से चितचोर
सरक सरक चूनर गिरे , मिले न कोई छोर
-- ज्योत्सना सक्सेना

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