अंजुरी भर हरसिंगार
गुरुवार, मार्च 26, 2015
एक श्रृंगारिक दोहा
राधा सुनती बांसुरी , अलि करता मधुपान
सन्नाटों को तोड़ अब , छोडो झूठा मान
-- ज्योत्सना सक्सेना
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