सोमवार, मार्च 09, 2015

कुछ दोहे और ''फाग ''पर ,,, सुधिजनो का मार्गदर्शन अपेक्षित *****************************************************************


बैर भाव सब भूलकर , खूब बजाओ चंग
होली के हुड़दंग में , चढ़े प्रेम की भंग
किंशुक कुसुम में चटके , तरुणाई का रंग
सुर्ख रंग से तन रंगे , मन में बसे उमंग
वृन्दावन में मन बसे , कान्हा का हुड़दंग
राधा पी की बावरी , ठुमके कृष्णा संग
जाम छलकाए मेघ रे , मदिरम फाग समीर
हिरणी सी रास्ता तके , सजनी हुई अधीर
-- ज्योत्सना सक्सेना

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