गुरुवार, मार्च 26, 2015

.इन्द्रधनुषी ख्वाब


कुछ घाटी के इधर 
कुछ पर्वतों के उधर 
इन्द्रधनुष ने बो दिए
आशा के सपनीले रंग
साँसों में महकने लगी
फूलों भरी भीनी सुगंध
बैंगनी सी निंदिया हुई
जामुनी हुए सलोने ख्वाब
अनंत गहराइयों भरा …
नीला आसमान….
हरी हुई वसुंधरा …
फसलों से मालामाल
पीली पीली सरसों चटकी,,,,
अवनि अम्बर का ….
मौन मिलाप ….
नारंगी अरु झूमते पुष्प
पुलकित दुल्हन सी सांझ
देखो जरा भास्कर का हाल
छिटका कर सिन्दूर भर दिया
धरती हुई लाज से लाल ,,,,
- ज्योत्सना सक्सेना

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