सोमवार, फ़रवरी 23, 2015

धुंध

रिश्तों की धुंध पर प्यार का सूरज छाएगा 
भ्रम के कुहासे को पल में निगल जायेगा 
ह्रदय साज पर बज उठेंगे फिर जलतरंग 
मीत सुहानी  सी इक ग़ज़ल गुनगुनाएगा 
-- ज्योत्सना सक्सेना

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें