शुक्रवार, फ़रवरी 06, 2015

सुलगता चाँद

राहे - मोहब्बत ऐसा होता क्यों है
प्रेमी महफ़िल भी , तनहा होता क्यों है
जीने का हुनर सिखाने वालों के पीछे
ये ज़माना खंजर लिए फिरता क्यों है
मौसम खुशगवार बनाने वालों की
दीवानगी में जग कांटे बोता क्यों है
हंसकर जो दर्द के प्याले पी ले, उनपर
बेदर्द ज़माना सितम करता क्यों है
होठों पे अब हंसी ले आओ 'ज्योत्स्ना '
सितम के बाद भी चाँद सुलगता क्यों है
-- ज्योत्सना सक्सेना

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