एक दोहा आप सभी मनीषियों के सम्मुख ,,,,
आपके सुझावों का हृदय से स्वागत ,,,,,,
सृजन के कुछ छोड़ दो , धरती में तुम बीज
माटी से मिल जायगी , माटी जैसी चीज़
-- ज्योत्सना सक्सेना
आपके सुझावों का हृदय से स्वागत ,,,,,,
सृजन के कुछ छोड़ दो , धरती में तुम बीज
माटी से मिल जायगी , माटी जैसी चीज़
-- ज्योत्सना सक्सेना
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