नरभक्षी या हैवान हैं , सांप तुम पाल रहे
नापाक तेरे पंथ पे ,तुझको ही खाए हैं
खाए है बहलाये है , तुझ पर गुर्रा रहे
थपकी दे पीठ पर , हौसले बढ़ाएं हैं
हौसले जो बढ़ाएं हैं , कहर कैसे ढा रहे
पत्थर तक रो पड़े , बच्चों को सताए हैं
बच्चों के शव को देख, यम भी घबरा रहे
दुखी होके खड़े प्रभु , नैन झुकाये हैं
-- ज्योत्सना सक्सेना
नापाक तेरे पंथ पे ,तुझको ही खाए हैं
खाए है बहलाये है , तुझ पर गुर्रा रहे
थपकी दे पीठ पर , हौसले बढ़ाएं हैं
हौसले जो बढ़ाएं हैं , कहर कैसे ढा रहे
पत्थर तक रो पड़े , बच्चों को सताए हैं
बच्चों के शव को देख, यम भी घबरा रहे
दुखी होके खड़े प्रभु , नैन झुकाये हैं
-- ज्योत्सना सक्सेना
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