शनिवार, दिसंबर 20, 2014

नरभक्षी या हैवान हैं , सांप तुम पाल रहे 
नापाक तेरे पंथ पे ,तुझको ही खाए हैं 
खाए है बहलाये है , तुझ पर गुर्रा रहे 
थपकी दे पीठ पर , हौसले बढ़ाएं हैं 
हौसले जो बढ़ाएं हैं , कहर कैसे ढा रहे 
पत्थर तक रो पड़े , बच्चों को सताए हैं
बच्चों के शव को देख, यम भी घबरा रहे
दुखी होके खड़े प्रभु , नैन झुकाये हैं
-- ज्योत्सना सक्सेना

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