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गीतिका के छंद सा मन , माथ टीका सज गया
मोरपंखी भाव सजना , ह्रदय साज बज गया
प्यार का सन्देश पाकर , धार काजल बह गया
नैन दरिया बरस कैसे , चुगलखोरी कर गया
-- ज्योत्सना सक्सेना
गीतिका के छंद सा मन , माथ टीका सज गया
मोरपंखी भाव सजना , ह्रदय साज बज गया
प्यार का सन्देश पाकर , धार काजल बह गया
नैन दरिया बरस कैसे , चुगलखोरी कर गया
-- ज्योत्सना सक्सेना
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