सुरमुई सांझ नारंगी रंग से मोहब्बत की इबारत लिखने लगी
आसमान के इंद्र दरबार में ख्वाइशों की अप्सराएं सजने लगीं
सावन के भरे भरे तनहा बादल प्यास ही प्यास बरसाने लगे
आस भरी रब की नेमत में प्रियतम आज फिर याद आने लगे
-- ज्योत्सना सक्सेना
आसमान के इंद्र दरबार में ख्वाइशों की अप्सराएं सजने लगीं
सावन के भरे भरे तनहा बादल प्यास ही प्यास बरसाने लगे
आस भरी रब की नेमत में प्रियतम आज फिर याद आने लगे
-- ज्योत्सना सक्सेना
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