सोमवार, जून 16, 2014

सुरमुई सांझ नारंगी रंग से मोहब्बत की इबारत लिखने लगी 
आसमान के इंद्र दरबार में ख्वाइशों की अप्सराएं सजने लगीं 
सावन के भरे भरे तनहा बादल प्यास ही प्यास बरसाने लगे 
आस भरी रब की नेमत में प्रियतम आज फिर याद आने लगे 
-- ज्योत्सना सक्सेना

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें