मोरपंखी भाव सजना , ह्रदय साज बज गया
क्यों गए परदेस साजन काग बोले अटरिया
बरस करके एक बादल बात सारी कह गया
राग भरा दर्द सारा आखर आखर लिख गया
प्यार का सन्देश पाकर , धार काजल बह गया
रात नीले पंख सवार दे रही है दुहाई
समझ विवशता मेरा दिल पाषाण बन सब सह गया
चटकती कलियाँ सुमन की गंध का देतीं पता
कर्तव्य रवि उग आया स्वप्न पुल अब ढह गया
-- ज्योत्सना सक्सेना .
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